क्षमता एवं उपयोग

वित्तीय निष्पादन

   
 
 

क्षमता एवं उपयोगिता

विगत 15 वर्षो की औसत भण्डारण क्षमता

आँकड़े मे.टन में

वर्ष

क्षमता

उपयोगिता

प्रतिशत

Owned

Hired

कुल

1993-94

803660

616337

1419997

1268397

87.00

1994-95

849457

597479

1446936

1263190

87.00

1995-96

919255

508123

1427378

1270510

89.00

1996-97

963941

503154

1467095

1259050

86.00

1997-98

1075905

451720

1527625

1295893

85.00

1998-99

1169862

415831

1585693

1321854

83.00

1999-00

1245283

455908

1701191

1469275

86.00

2000-01

1333273

492756

1826029

1705848

93.00

2001-02

1359000

487000

1846000

1588000

86.00

2002-03

950577

228417

1178994

950449

81.00

2003-04

963344

203946

1167290

904506

77.00

2004-05

964788

213012

1177800

922336

78.00

2005-06

977835

210081

1187916

945694

80.00

2006-07

1053028

117498

1170526

825948

71.00

2007-08

1102960

88377

1191337

890772

75.00

2008-09

11411451

256620

1397765

1181510

85.00

 
 

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ग्राफ़िकल प्रस्तुति

 
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जमाकर्तावार संग्रहित स्कंध की स्थिति

   
 

क्रं.

जमाकर्ता

2005-06

2006-07

2007-08

2008-09

1

कृषक

8.62

9.92

12.48

7.54

2

सहकारी संस्थाये

22.40

31.80

12.51

6.33

3

भारतीय खाद्य निगम

4.34

6.76

8.23

15.01

4

सिविल सप्लाई कार्पोरेशन

31.59

14.44

14.72

46.81

5

शासकीय संस्थाये

3.36

3.67

1.88

2.24

6

लघु वनोपज संघ

12.00

3.36

1.37

0.37

7

व्यापारी

17.69

30.05

48.81

21.70

8

अन्य

0.00

0.00

0.00

0.00

 

कुल

100.00

100.00

100.00

100.00

   
 

ग्राफ़िकल प्रस्तुति

 
   
 

भंडारण क्षमता एवं उपयोगीता माह : जून 2009

 

आँकड़े मे.टन में

   
 

क्र.

क्षेत्र

शाखाओं की संख्या

गोदामों की संख्या

कुल क्षमता

कुल उपयोगीता

उपयोगीता का %

1

भोपाल

50

376

5,49,922

5,52,888

101

2

ग्वालियर

39

328

3,99,347

4,29,089

107

3

जबलपुर 

36

297

3,14,289

3,05,826

97

4

इन्दौर

45

335

3,06,384

2,98,764

98

5

उज्जैन

29

235

3,12,307

2,93,239

94

6

सागर

28

196

2,20,980

2,43,212

110

7

रीवा

29

160

1,43,123

1,54,057

108

 

कुल

 256

1927

22,46,352

22,77,075

101

   
 

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ग्राफ़िकल प्रस्तुति

 
   
 

वित्तीय निष्पादन

 

पिछले 15 वर्षों का व्यापार परिणाम

 

आँकड़े लाख में

 

वर्ष

आय

प्रचालन व्यय

ब्याज

मूल्यह्रास

कुल व्याय

मुनाफा

प्रतिशत

1991-92

1274.55

851.53

112.18

119.40

1083.11

191.44

5%

1992-93

1463.66

960.09

107.15

127.16

1194.40

269.26

5%

1993-94

2292.13

1377.86

94.49

143.34

1615.69

676.44

8%

1994-95

2250.72

1446.64

52.39

158.92

1657.95

592.77

6.5%

1995-96

2452.67

1623.40

15.17

205.95

1844.52

608.15

8%

1996-97

2662.30

1761.69

62.52

233.86

2058.07

604.23

8%

1997-98

2739.49

1950.45

137.29

297.13

2384.87

354.62

8%

1998-99

3117.25

2224.93

259.55

357.37

2841.85

275.40

8%

1999-00

3588.39

2401.65

344.25

415.54

3161.44

426.95

10.6%

2000-01

4864.51

2553.36

329.87

468.09

3351.32

1513.19

12%

2001-02

5393.03

2694.59

159.35

495.37

3249.31

2137.76

20%

2002-03

3540.82

1786.71

13.60

353.00

2153.31

1387.51

20%

2003-04

3332.05

1871.52

8.09

369.14

2248.75

1083.30

20%

2004-05

3585.94

3402.90

262.76

372.34

2767.80

818.14

20%

2005-06

3945.61

2156.01

53.20

367.09

2576.30

1369.31

20%

2006-07

3471.17

2333.63

80.86

382.65

2797.14

674.03

20%

2007-08

3833.21

2688.24

91.57

433.84

3213.65

619.56

20%

2008-09

4876.70

2960.60

63.49

472.8

3496.89

1379.81

20%

   
 

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वर्ष 2009-2010 के बजट अनुमान के मुख्य बिन्दु :

   

1.

वर्ष 2009-10 में निगम की कुल औसत भण्डारण क्षमता 15.00 लाख मे.टन का अनुमान है। तथा इसके लगभग 87 प्रतिशत औसत उपयोग का लक्ष्य है।

2.

वर्ष 2009-10 में निगम की कुल आय रूपये 5665.00 लाख तथा कुल आवर्ती व्यय रूपये 4605.20 लाख अनुमानित है। कर पूर्व लाभ रूपये 1059.80 लाख संभावित है।

3.

गोदाम निर्माण

(i) वर्ष 2009-10 में 54000 में. टन क्षमता के स्पील ओव्हर गोदाम निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य है जिस पर रूपये     10.41 करोड़ व्यय संभावित है।
(ii) वर्ष 2009-10 में मरम्मत एवं अनुशंगिक कार्यो हेतु रू. 5.00 करोड़ का व्यय प्रस्तावित किया गया है।

4.

वर्ष 2009-10 में डी.ई.एस.एस.(Disinfestation service scheme) के कार्य से 20 लाख आय का लक्ष्य रखा गया है।

5.

केरोसिन विक्रय करने से रूपये 20.00 लाख की आय अनुमानित है।

 

 

 

मध्य प्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लाँजिस्टिक्स कार्पोरेशन,
(कमर्शियल सेक्शन) प्रधान कार्यालय, भोपाल

क्रं.5 मप्र वे लाका/कमर्शियल - 340/3099

भोपाल, दि.20 अगस्त, 08

 

-: आदेश :-

MPWLC की संचालक मंडल की बैठक दिनांक 02 अगस्त 2008 के प्रस्ताव ठहराव क्र.- 14, के अन्तर्गत लिये गये, निर्णयानुसार बाहय कीटनाशक विस्तार सेवा शुल्क हेतु दिनांक 01 अपैल 2001 से प्रभावशील सेवा शुल्क दर को संगतयुक्त पुनरीक्षित करते हुये सेवा शुल्क दरों का निम्नानुसार पुनः निर्धारण किया जाता है :-

 

 

 

क्र.

बाहय कीटनाशक सेवा का विवरण

पुनरीक्षित दरें

1.

डी.डी.व्ही.पी./ डेल्टामेथरिन/ मैलाथियान स्प्रै
अ) प्रथम कम से कम 500 वर्ग मीटर हेतु

रू. 250/-

ब) प्रत्येक 100 वर्ग मीटर या उसके टुकड़े हेतु

रू 50/-

2.

फूमिगेशन

रू.20.00 प्रति में.टन

3.

'' इनिशियल फूमिगेशन चार्जेस ''
भण्डारगृह में स्कंध जमा करते समय समस्त जमाकर्ताओं हेतु

रू.10.00 प्रति में.टन

 

 

DESS योजना के तहत किये जाने वाले कार्य में स्टाँफ के परिवहन का व्यय (भण्डारगृह शाखा से कार्यस्थल तक जाने एवं आने हेतु) अग्राहिता द्वारा वहन किया जायेगा।
पुनरीक्षित दरे दिनांक 08-08-08 से प्रभावशील होंगी ।

 

 

सही/-
(म.म.नागर)
सेक्रेटरी एण्ड कमर्शियल मैनेजर
94253-93501

 

क्रं[email protected] मप्र वे लाका/ कमर्शियल- 340/3099A
भोपाल, दि. 20 अगस्त 08

 

1. समस्त सेक्शन हेड, प्रधान कार्यालय,WLC भोपाल।
2. रीजनल मेनेजर, मध्यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लाँजिस्टिक्स कार्पोरेशन, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इन्दौर, उज्जैन, सागर एवं रीवा।
3. समस्त ब्रांच मैनेजर, मध्य प्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लाँजिस्टिक्स कार्पोरेशन, मध्य प्रदेश।

 

 

सही/-
सेक्रेटरी एण्ड कमर्शियल मैनेजर

 

 

मध्यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लाँजिस्टिक्स कार्पोरेशन
निजी वेअरहाउस मालिकों के साथ संयुक्त भागीदारी अनुबंध योजना

 

 

-: अनुबंध - पत्र :-

यह अनुबंध पत्र आज दिनांक माह, 2009 (वार) को मध्य प्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लाँजिस्टिक्स कार्पोरेशन जो कि मध्य प्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लाँजिस्टिक्स कार्पोरेशन एक्ट 1962 के अन्तर्गत एक पंजीकृत संस्था है। जिसका पंजीकृत कार्यालय गौतम नगर, भोपाल (म.प्र) में स्थित हैं, जिसको आगे ''निगम'' के नाम से सम्बोधित किया जायेगा एवं इस पद के अंतर्गत जहां भी संदर्भ से स्वीकार हो, उसके वारिस, विधिक प्रतिनिधि, प्रशासक एवं निष्पादक सम्मिलित है।

प्रथम पक्ष ।

एवं

......................जो कि एक पंजीकृत फर्म/कंपनी है, जिसका प्रधान कार्यालय/पंजीकृत कार्यालय ............... में स्थित हैं, जिसको आगे ''गोदाम मालिक'' के नाम से सम्बोधित किया जायेगा एवं इस पद के अंतर्गत जहां भी संदर्भ से स्वीकार हो, उसके वारिस, विधिक प्रतिनिधि, प्रशासक एवं निष्पादक सम्मिलित है।

द्धितीय पक्ष ।

 

 

यह कि प्रथम पक्ष को अधिसूचित वस्तुओं के वैज्ञानिक भण्डारण के क्षेत्र का दीर्घ अनुभव हैं एवं चूंकि निकट भविष्य में, वैज्ञानिक भण्डारण की आवश्यकता के अनुपात में, निगम द्वारा क्षमता वृद्धि नहीं की जा सकी हैं, अतएव प्रथम पक्ष के निर्देशक मंडल ने इस क्षेत्र में आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय लिया हैं कि प्रथम पक्ष निजी गोदामों का परिचालन, निजी गोदाम मालिकों के साथ सहभागिता कर, '' ज्वांट-वेन्चर'' अनुबंध के तहत, प्रथम पक्ष स्कंध के परिचालित नीतियों के अनुसार करें।

यह कि प्रथम पक्ष ने इस हेतु प्रत्याशित फर्म/संस्थाओं के द्वारा प्रस्तुत जानकारी एवं उनकी वित्तीय स्थिति को विचार करते हुए द्वितीय पक्ष का चयन किया है।

यह कि द्वितीय पक्ष एक प्रायवेट लाईसेंसधारी वेअरहाउस के गोदाम मालिक है एवं श्री ..........का वेअरहाउस ................. उपरोक्त वेअरहाउस (गोदाम) प्रथम पक्ष की शर्तों के अनुसार देने के लिए तत्पर हैं, यह कि द्वितीय पक्ष अपना वेअरहाउस (गोदाम) प्रथम पक्ष के द्वारा प्रचारित ''प्रायवेट वेअरहाउस मालिकों के साथ संयुक्त भागीदारी अनुबंध योजना'' के अन्तर्गत निम्नशर्तों पर देने को सहमत है:-

 

1.

यह कि द्वितीय पक्ष इस अनुबंध के निष्पादन के 30 दिवस के अन्तर्गत रू 12.50 प्रति में.टन की दर से प्रतिभूति राशि प्रथम पक्ष के पास जमा करेगा, जो प्रस्तुत अनुबंध की समाप्ति पर बिना किसी ब्याज के द्वितीय पक्ष को वापस कर दी जायेगी।

2.

यह कि उपरोक्त वेअरहाउस (गोदाम) से प्राप्त होने वाले भण्डारण शुल्क का 60 प्रतिशत द्वितीय पक्ष को एवं शेष 40 प्रतिशत भण्डारण शुल्क प्रथम पक्ष को देय होगा।

3.

यह कि उपरोक्त वेअरहाउस (गोदाम) का बीमा, रखरखाव, बिजली व्यय, संपत्ति कर इत्यादि के वहन/ भुगतान करने की जिम्मेदारी द्वितीय पक्ष की होगी।

4.

यह कि प्रथम पक्ष अधिरक्षक सेवा प्रदान करते हुये, सेवा श्रमिकों की व्यवस्था करेगा एवं भण्डारित स्कंध के कीटोपचार की सुविधा भी प्रदान करेगा।

5.

यह कि प्रथम पक्ष उपरोक्त वेअरहाउस (गोदाम) की अधिकाधिक उपयोगिता प्राप्त करने के लिये मार्केटिंग सुविधायें भी प्रदान करेगा, कीटोपचार, मार्केटिंग तथा अभिरक्षा की सुविधाओं के लिए प्रथम पक्ष को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देय होगा।

6.

यह कि प्रथम पक्ष उपरोक्त वेअरहाउस (गोदाम) में भण्डारित स्कंध की वेअरहाउस रसीद जारी करेगा तथा जमाकर्ता को व्यवसायिक बैंक से ऋण दिलाने में मदद करेगा। एवं यदि प्रथम पक्ष बैंक से ऋण दिलाने में किसी प्रकार की कमीशन अथवा फीस आदि मिलती है तो वह एकल रूप से प्रथम पक्ष की आय होगी। उसका कोई भी अंश द्वितीय पक्ष को देय नहीं होगा।

7.

गोदामों में स्कंध जमा होने के दौरान कभी-कभी जमाकर्ता के द्वारा कीटग्रस्त स्कंध भी जमा हेतु प्राप्त होता हैं जिसका तत्काल प्राथमिक धुम्रीकरण (initial fumigation) किया जाना अनिवार्य होता हैं, ताकि गोदामों में पहले भण्डारित उपचारित स्कंध पर नए आने वाले स्कंध के दुष्प्रभाव न हो। वर्तमान में निगम प्राथमिक धुम्रीकरण (initial fumigation) की दरे रू.10 प्रति में.टन निर्धारित है, यह राशि जमाकर्ता के द्वारा प्राथमिक धुम्रीकरण हेतु पृथक से भुगतान की जाती है। यह भण्डारण शुल्क के अतिरिक्त आय है। अतः इस मद में प्राप्त होने वाली राशि का कोई भी अंश द्वितीय पक्ष को देय नहीं होगी।

8.

यह कि प्रथम पक्ष के उक्त योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा। एवं किसी स्थान अथवा ब्रांच का चयन अतएव इस कार्य हेतु उपलब्ध किये जाने वाले कर्मचारी अथवा प्रबंधकगण का चयन प्रथम पक्ष के द्वारा किया जायेगा, परंतु श्रमिकों की सेवायें ठेके पर प्रथम पक्ष के द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी।

9.

यह कि ऐसी दशा में जब जमाकर्ता को भण्डारण के संबंध में द्वितीय पक्ष की असावधानी अथवा अवहेलना से किसी प्रकार का नुकसान होता हैं तो उसकी भरपाई करने की जिम्मेदारी द्वितीय पक्ष की होगी। यदि द्वितीय पक्ष भरपाई करने में आना-कानी करता हैं अथवा किसी प्रकार का विवाद करता हैं तो प्रथम पक्ष अपने पास जमा प्रतिभूति राशि से ऐसे जमाकर्ता को उसके नुकसान की भरपाई कर सकेगा। द्वितीय पक्ष को इस संदर्भ में किसी प्रकार का विवाद करने का अधिकार नहीं होगा।

10.

यह कि प्रस्तुत अनुबंध आज की तारीख से 5 वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। जिसे उभयपक्ष आपसी सहमति सs आगे बढा़ सकते है।

11.

यह कि उभयपक्ष 3 माह की लिखित सूचना देकर किसी भी समय इस अनुबंध को समाप्त कर सकते हैं, परन्तु अनुबंध की समाप्ति, कृषि वर्ष अर्थात 01 अक्टूबर से 30 सितम्बर या 01 अप्रेल से 31 मार्च के पूर्ण होने पर ही किया जा सकेगा।

12.

यह कि प्रस्तुत अनुबंध के समापन के समय उपरोक्त वेअरहाउस (गोदाम) में किसी जमाकर्ता का स्कंध भण्डारित हैं तो ऐसी दशा में द्वितीय पक्ष ऐसे जमाकर्ता की सहमति ले कर फ्रेश रसीद जारी करेगा तथा स्कंध की सुरक्षा की जिम्मेदारी द्वितीय पक्ष की होगी। यदि वह जमाकर्ता सहमत नहीं हैं तो भण्डारित स्कंध की निकासी की अवधि तक यह अनुबंध प्रभावी रहेगा।

13.

यह कि प्रस्तुत अनुबंध पत्र मध्यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लाँजिस्टिक्स कार्पोरेशन एक्ट, 1962 एवं उसके अंतर्गत निगमित नियमों के अध्यायीन होगा एवं प्रथम पक्ष को उपरोक्त अधिनियम अथवा नियमों के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों को यदि किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव डालता हैं तो उस सीमा तक निष्प्रभावी एवं शुल्य माना जायेगा।

14.

यह कि ऐसी दशा में यदि उभयपक्ष के मध्य इस अनुबंध अथवा उसके व्याख्या के संबंध में किसी प्रकार का विवाद होता हैं तो उसका निपटारा आर्बिट्रेशन एवa कन्सीलियेशन एक्ट 1996 के अंतर्गत किया जायेगा एवं इस हेतु प्रथम पक्ष के प्रबंध संचालक एक मात्र आर्बिट्रेटर होंगे। आर्बिट्रेशन का स्थान भोपाल होगा।

यह अनुबंध पत्र आज दिनांक को भोपाल में निम्न साक्षियों के समक्ष हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया।

 

 

साक्षीगण:-

 

प्रथम पक्ष )

द्वितीय पक्ष)

नाम :- ...............
रीजनल मेनेजर
मध्यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लाँजिस्टिक्स कार्पोरेशन
रीजन ....................

 

 

 
 अधिकृत: Bit-7 Informatics